किसान साथियों नमस्कार, पर्माकल्चर यानी “परमानेंट एग्रीकल्चर” (स्थायी कृषि)। यह एक ऐसी तरकीब है जिसमें हम प्रकृति की नकल करते हुए अपने खेत, बगीचे और जिंदगी को इस तरह से बनाते हैं कि वह लंबे समय तक चले, खुद-ब-खुद काम करे और हमें ज्यादा मेहनत न करनी पड़े।
पर्माकल्चर के नियम
1. धरती माँ की देखभाल:- मिट्टी, पानी, पेड़-पौधों और सभी जीव-जंतुओं का ख्याल रखना।
2. लोगों की देखभाल:- अपना, अपने परिवार और अपने समुदाय का भला सोचना।
3. बाँटना:- जो जरूरत से ज्यादा पैदा हो, उसे दूसरों के साथ बाँटना और बर्बाद न होने देना।
पर्माकल्चर के सिद्धांत
1. पहले देखो, फिर करो:- अपने खेत को अच्छे से जानो। कहाँ धूप ज्यादा रहती है? कहाँ पानी भरता है? कौन से कीड़े फायदेमंद हैं? अच्छी तरह देखने के बाद ही कोई कदम उठाओ।
2. ऊर्जा बचाओ और जमा करो:- जब संसाधन भरपूर हों तो उन्हें स्टोर कर लो। जैसे बारिश का पानी टैंक में जमा करना, खाद बनाकर मिट्टी की ताकत बढ़ाना, या सूरज की रोशनी का फायदा उठाना।
3. मेहनत का फल मिलना चाहिए:- यह सुनिश्चित करो कि तुम्हारे खेत से तुम्हें खाना, आमदनी या कोई न कोई फायदा मिलता रहे। खेत ऐसा हो कि वह तुम्हें पाले, तुम्हें उसे नहीं।
4. गलतियों से सीखो:- अगर कोई फसल या तरीका काम नहीं कर रहा, तो उसे जबरदस्ती मत करो। प्रकृति से सीखो और अपने तरीके सुधारते रहो।
5. ऐसी चीजों का इस्तेमाल करो जो दोबारा उग आएँ: पेट्रोल-डीजल जैसी चीजों पर निर्भरता कम करो। हवा, पानी, सूरज की रोशनी और जैविक खाद जैसे संसाधनों को तरजीह दो।
6. कुछ भी बर्बाद मत होने दो:- “कचरा” जैसी कोई चीज नहीं होती। रसोई के छिलके और पत्तियों से खाद बनाओ। गंदे पानी को पौधों के लिए दोबारा इस्तेमाल करो। एक चीज का कचरा, दूसरे के काम आना चाहिए।
7. बड़ी तस्वीर पहले देखो:- पहले अपने पूरे खेत का नक्शा (जैसे पहाड़ी, निचली जमीन, पानी का बहाव) समझो, फिर छोटे-छोटे हिस्सों में काम करो।
8. सबको साथ जोड़ो:- अलग-अलग चीजों को मिलाकर काम करवाओ। जैसे, मुर्गियाँ खेत के कीड़े खाएँ और उनकी बीट खाद का काम करे। पेड़ पक्षियों को आकर्षित करें जो हानिकारक कीटों को खाएँ।
9. छोटे और टिकाऊ कदम उठाओ:- एक साथ बहुत बड़ा बदलाव लाने की कोशिश मत करो। छोटे-छोटे, सस्ते और आसान तरीके अपनाओ जो लंबे समय तक चल सकें।
10. अलग-अलग प्रजातियाँ उगाओ:- सिर्फ एक ही फसल (मोनोक्रॉप) न उगाओ। कई तरह के पेड़, झाड़ियाँ, सब्जियाँ और फल लगाओ। इससे अगर एक फसल खराब भी होगी, तो दूसरी बच जाएगी और मिट्टी भी स्वस्थ रहेगी।
11. “किनारों” का फायदा उठाओ:- दो अलग-अलग जगहों के मिलने वाले हिस्से (जैसे तालाब का किनारा, जंगल और खेत की सीमा) सबसे ज्यादा उपजाऊ होते हैं। इन जगहों पर ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाओ।
12. बदलाव के साथ तालमेल बिठाओ:- मौसम और बाजार बदलता रहता है। हमें नई परिस्थितियों के अनुसार अपने तरीके बदलने चाहिए। मुश्किल को अवसर में बदलने की सोच रखो।
किसान भाइयों के लिए पर्माकल्चर के क्या फायदे हैं:-
* मिटटी की सेहत सुधरती है और वह ज्यादा समय तक उपजाऊ रहती है।
* पानी की बचत होती है, सूखे का असर कम होता है।
* रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर खर्च कम हो जाता है।
* अलग-अलग फसलों से आमदनी के ज्यादा स्रोत बनते हैं।
* प्रकृति के साथ तालमेल बैठने से लंबे समय तक खेती चलती रहती है।
पर्माकल्चर कोई जटिल विज्ञान नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ मिलकर चलने का एक समझदारी भरा तरीका है। यह हमें सिखाता है कि कम लागत और कम मेहनत में कैसे बेहतर और टिकाऊ खेती की जा सकती है।
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