गेहूं की नई किस्म HD 3388 (पूसा यशोधरा): जानिए बुआई, पैदावार और पूरी जानकारी

By Kheti jankari

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HD 3388

गेहूं की खेती करने वाले किसान भाइयों के लिए सही बीज का चुनाव करना सबसे बड़ा फैसला होता है। हर साल बाजार में कई नई किस्में आती हैं, लेकिन कौन-सी किस्म हमारे खेत के लिए सही रहेगी और कम लागत में अच्छा मुनाफा देगी, यह समझना बहुत जरूरी है।

आज के इस लेख में हम भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI), नई दिल्ली द्वारा विकसित गेहूं की एक बेहद चर्चित किस्म HD 3388, जिसे पूसा यशोधरा (Pusa Yashodhara) के नाम से भी जाना जाता है, के बारे में सम्पूर्ण जानकारी मिलेगी।

HD 3388 (पूसा यशोधरा) क्या है और यह क्यों खास है?

HD 3388 गेहूं की एक बायोफोर्टिफाइड (Biofortified) किस्म है। आसान शब्दों में कहें तो इसके दानों में सामान्य गेहूं के मुकाबले पोषण (खासकर प्रोटीन) की मात्रा अधिक होती है।

लेकिन सिर्फ पोषण ही नहीं, इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत इसका कम समय में पककर तैयार होना और अगेती गर्मी को सहने की क्षमता है। अक्सर मार्च के महीने में अचानक तापमान बढ़ने से गेहूं के दाने पतले हो जाते हैं, लेकिन HD 3388 के साथ यह समस्या बहुत कम देखने को मिलती है।

HD 3388 गेहूं किस्म की मुख्य विशेषताएं

इस किस्म में क्या-क्या खूबियां हैं:

  • कम अवधि की फसल: यह किस्म लगभग 124 से 125 दिनों में पककर कटाई के लिए तैयार हो जाती है। कम दिन की फसल होने के कारण खेत अगली फसल के लिए जल्दी खाली हो जाता है।
  • शानदार दाना और चपाती: इसके दाने चमकदार, सुडौल और वजनदार होते हैं। इसकी रोटियां बहुत नरम बनती हैं और खाने में स्वादिष्ट होती हैं।
  • मजबूत पौधा: इस किस्म के पौधे की ऊंचाई लगभग 100 सेंटीमीटर के आसपास रहती है। तना मजबूत होने की वजह से तेज हवा या हल्की बारिश में फसल के गिरने (Lodging) का खतरा कम रहता है।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता: इस किस्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी बीमारी से लड़ने की क्षमता है। यह पीला रतुआ (Yellow Rust), भूरा रतुआ और करनाल बंट जैसी प्रमुख बीमारियों के प्रति काफी हद तक प्रतिरोधी है, जिससे दवाइयों का खर्च बचता है।

HD 3388 गेहूं किस्म की पैदावार

अगर सही समय पर बुआई की जाए और खाद-पानी का सही प्रबंधन हो, तो HD 3388 से औसतन 52 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (यानी लगभग 20 से 21 क्विंटल प्रति एकड़) तक की उपज आसानी से ली जा सकती है। अच्छी देखभाल और संतुलित उर्वरक प्रबंधन से इसकी पैदावार और भी बेहतर हो सकती है।

HD 3388 गेहूं किस्म बुआई का सही समय

इस किस्म की बुआई का सबसे उपयुक्त समय 1 नवंबर से 15 नवंबर के बीच माना जाता है। यह समय पर सिंचित अवस्था में बोई जाने वाली किस्म है।

निष्कर्ष

यदि आप उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्रों से आते हैं और एक ऐसी किस्म चाहते हैं जो 125 दिनों के भीतर पककर तैयार हो जाए, बीमारियों से बची रहे और मंडी में इसका अच्छा भाव मिले, तो HD 3388 (पूसा यशोधरा) आपके लिए एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प साबित हो सकती है।

ध्यान दें: अपने क्षेत्र की मिट्टी और मौसम के अनुसार सही बीज की मात्रा और बुआई के तरीके के लिए नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या कृषि अधिकारी से भी सलाह जरूर लें।

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