अरहर की खेती:- किसान साथियों नमस्कार, अप्रैल और मई के महीने में आलू की खुदाई और गेहूं की कटाई के बाद खेत खाली छूट जाते हैं। किसान इस समय खेत को बिना उपयोग के न छोड़ें, बल्कि एक लाभदायक फसल की बुवाई करके अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं। यह फसल न केवल मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है, बल्कि किसानों के लिए बेहतरीन मुनाफा भी देती है। आज हम बात कर रहे हैं अरहर की खेती की, विशेषकर इसकी उन्नत किस्म आईपीए 203 के बारे में, जो किसानों के लिए एक वरदान साबित हो रही है।
मूंग की उन्नत खेती:बजाई समय, बीज मात्रा सम्पूर्ण
अरहर की खेती
अरहर एक महत्वपूर्ण दलहनी फसल है, जिसकी मांग हमेशा बाजार में बनी रहती है। इसके बीजों में उच्च प्रोटीन सामग्री होती है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। इसकी खेती से न केवल किसानों को अच्छी आमदनी होती है, बल्कि यह मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा भी बढ़ाती है, जिससे अगली फसल के लिए खेत उपजाऊ बना रहता है।
अरहर की आईपीए 203 किस्म
अरहर की आईपीए 203 किस्म एक लंबी अवधि (लगभग 246 दिन) वाली फसल है, जो उच्च पैदावार के लिए जानी जाती है। यह किस्म कई प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता रखती है, जिससे फसल को नुकसान कम होता है और उत्पादन अधिक मिलता है।
अरहर की आईपीए 203 किस्म की खेती कैसे करें?
1. खेत की तैयारी
- सबसे पहले खेत की गहरी जुताई करें ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए।
- गोबर की खाद या कम्पोस्ट डालकर मिट्टी को उपजाऊ बनाएं।
- खेत में जल निकासी का उचित प्रबंध करें, क्योंकि अरहर की फसल को जलभराव पसंद नहीं होता।
2. बीज का चयन एवं बुवाई
- आईपीए 203 किस्म के बीज बाजार या कृषि विभाग से प्राप्त करें।
- बुवाई का सही समय अप्रैल-मई है, जब खेत खाली होते हैं।
- बीज की मात्रा: 12-15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर।
- बीज को 3-5 सेमी गहराई में बोएं और पंक्तियों के बीच 45-60 सेमी की दूरी रखें।
3. सिंचाई प्रबंधन
- पहली सिंचाई बुवाई के 7-10 दिन बाद करें।
- फूल आने और दाना बनने के समय नमी की आवश्यकता अधिक होती है, इसलिए इस दौरान सिंचाई जरूर करें।
- अधिक पानी देने से बचें, क्योंकि इससे फसल को नुकसान हो सकता है।
4. खरपतवार एवं कीट प्रबंधन
- निराई-गुड़ाई करके खरपतवार नियंत्रित करें।
- कीटों से बचाव के लिए नीम का तेल या जैविक कीटनाशक का उपयोग करें।
- फसल चक्र अपनाकर रोगों से बचा जा सकता है।
5. कटाई एवं भंडारण
- फसल लगभग 8 महीने (246 दिन) में पककर तैयार हो जाती है।
- पौधों की पत्तियां पीली पड़ने और फलियों के सूख जाने पर कटाई करें।
- दानों को अच्छी तरह सुखाकर भंडारित करें ताकि कीड़े न लगें।
आईपीए 203 किस्म से कितनी कमाई होगी?
- उत्पादन: प्रति हेक्टेयर 18-20 क्विंटल तक।
- बाजार मूल्य: अरहर की दाल का भाव 5000-7000 रुपये प्रति क्विंटल तक होता है।
- कुल आय: 90,000 से 1,40,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक!
अप्रैल-मई में खाली पड़े खेतों में अरहर की आईपीए 203 किस्म की बुवाई करके किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। यह किस्म उच्च उपज, रोग प्रतिरोधक क्षमता और बेहतर गुणवत्ता वाली है, जिससे किसानों को बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। अगर आप भी खेती से अधिक लाभ कमाना चाहते हैं, तो इस सीजन में अरहर की आईपीए 203 किस्म जरूर उगाएं और बंपर कमाई करें। धन्यवाद!
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