गन्ने की बुवाई के बाद पहली खाद:- किसान साथियों नमस्कार, गन्ना भारत की एक प्रमुख नकदी फसल है, जिसकी खेती करने वाले किसानों को अच्छी पैदावार के लिए उचित देखभाल और पोषण प्रबंधन की आवश्यकता होती है। बुवाई के बाद पहली खाद का चुनाव गन्ने की वृद्धि और उत्पादकता को सीधे प्रभावित करता है। इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि गन्ने की बुवाई के बाद पहली खाद कौन सी डालें, इसके फायदे और उपयोग का सही तरीका क्या है।
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बुवाई के बाद पहली खाद क्यों जरूरी है?
बुवाई के बाद का समय गन्ने के पौधों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान पौधे अपनी जड़ें स्थापित करते हैं और वृद्धि शुरू करते हैं। चूंकि इस चरण में जड़ें पूरी तरह से विकसित नहीं होतीं, उन्हें आसानी से अवशोषित होने वाले पोषक तत्वों की जरूरत होती है। पहली खाद डालने से पौधों को यह पोषण मिलता है, जिससे वे स्वस्थ और मजबूत होकर आगे की वृद्धि के लिए तैयार होते हैं। यह खाद पौधों को शुरुआती ताकत देती है, जिसका असर पूरी फसल पर दिखाई देता है।
गन्ने की बुवाई के बाद पहली खाद
गन्ने की बुवाई के 25-30 दिन बाद पहली खाद के रूप में नाइट्रोजन युक्त उर्वरक जैसे यूरिया का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, फॉस्फोरस और पोटेशियम भी प्रारंभिक अवस्था में आवश्यक होते हैं।
गन्ने में इस समय हमें यूरिया 40 से 45 किलोग्राम प्रति एकड़ और इसके साथ हमें ह्यूमिक एसिड 98% वाला 2 किलोग्राम प्रति एकड़ को साथ में मिलाकर अपने गन्ने की फसल में डाल डालना है। ह्यूमिक एसिड गन्ने में जड़ों का विकास करता है, और यूरिया आपके गन्ने की बाहरी ग्रोथ को बढ़ाता है।
खाद डालने का सही तरीका
- बुवाई के 25-30 दिन बाद पहली खाद देना चाहिए।
- खाद को पौधों के आसपास छिड़काव या कुंड बनाकर देना चाहिए।
- खाद देने के बाद हल्की सिंचाई करें ताकि पोषक तत्व जड़ों तक पहुँच सकें।
- रासायनिक खाद के साथ जैविक खाद का उपयोग करना फायदेमंद होता है।
गन्ने की बुवाई के बाद पहली खाद के रूप में यूरिया या डीएपी का उपयोग सबसे अधिक प्रचलित है। हालांकि, मिट्टी की जाँच के आधार पर संतुलित NPK या जैविक खाद का चुनाव करना बेहतर होता है। सही समय और सही मात्रा में खाद देकर किसान गन्ने की उत्पादकता को काफी बढ़ा सकते हैं।
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