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पर्माकल्चर (स्थायी कृषि) क्या है: इसके मुख्या सिद्धांत समझें: The rules of permaculture

किसान साथियों नमस्कार, पर्माकल्चर यानी “परमानेंट एग्रीकल्चर” (स्थायी कृषि)। यह एक ऐसी तरकीब है जिसमें ...

गेहूं की पैदावार बढ़ाने का आसान तरीका:कुछ तरीके जानें जो आपकी पैदावार को बढ़ा सकते हैं

हर किसान चाहता है, कि उसकी फसल उसको अच्छी पैदावार निकाल कर दे और उसे अधिक मुनाफा हो। पैदावार बढ़ाने के चक्कर में किसान भाई अपनी फसलों में विभिन्न तरह के माइक्रोन्यूट्रिएंट्स व अन्य दवाइयां का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन फिर भी उनको अच्छे रिजल्ट नहीं देखने को मिलते।

फसल उत्पादन दोगुना करने के 10 आसान टिप्स: 10 easy tips to double crop production

किसान साथियों नमस्कार, कृषि में सफलता के लिए कुछ आसान और जरूरी कदमों का पालन ...

आलू की खेती कम लागत में कैसे करें:How to do potato farming

आलू की खेती लगभग पूरे भारत में की जाती है। पहाड़ी क्षेत्रों में भी आलू की खेती की जाती है। आलू बिजाई का सही समय हर क्षेत्र का अलग-अलग होता है। जब आपका आलू 20 से 30 दिन का होता है, उसे समय रात का तापमान 15 डिग्री से नीचे होना चाहिए। इस समय आलू में कांड बनते हैं और गर्मी में कांड कम बनते है। इसीलिए आलू की खेती सर्दी के मौसम में की जाती है।

लोकप्रिय गन्ना किस्म सीईओ-08272 की संपूर्ण विशेषताएं:CO-08272 Sugarcane Variety

सीईओ-08272 गन्ना किस्म एक अगेती गन्ना किस्म है। जो गन्ने में लगने वाले मुख्य रोग जैसे पोका बोइंग और रेड रोड रोगों के प्रति सहनशील है। इस किस्म का गन्ना ठोस होता है। इसकी लंबाई कम होती है।

गन्ने की अधिक पैदावार देने वाली गन्ना किस्म CO–11015 की विशेषताएं जानें:Sugarcane variety CO–11015

CO–11015 तमिलनाडु की गन्ना किस्म है। लेकिन इस किस्म की बजाई आप पुरे भारत में कर सकते है। जिसकी बजाई आप अक्टूबर और नवंबर में कर सकते हैं।

रेड रॉट रोग से बचाव के लिए इस गन्ना किस्म की करें बजाई:Early sugarcane variety of Uttar Pradesh

गन्ना किस्म COS-13231 एक उत्तर प्रदेश की गन्ना किस्म है। इस किस्म की पत्तियां मुलायम होती है। इसमें कांटे नहीं होते। इस किस्म की पोरी लम्बी होती है। और पोरी का कुछ भाग हल्का सफेद रंग का धब्बे होते है। इस किस्म की मोटाई माध्यम होती है।

जल भराव वाले क्षेत्रों में तहलका मचाएगी गन्ने की यह किस्म:COLK-15466 Sugarcane variety

गन्ने की यह किस्म लखनऊ गन्ना अनुसंधान संस्थान उत्तर प्रदेश द्वारा बनाई गई है। इस किस्म में कल्लों का फुटाव अधिक होता है। यह किस्म गिरने के प्रति सहनशील है। गुड़ बनाने और रस निकालने के लिए यह गन्ना सबसे उपयुक्त रहती है। इस किस्म में शर्करा की मात्रा 17.5% तक पाई जाती है। पोका बोईंग और लाल सड़न जैसे रोगों के प्रति यह गन्ना किस्म सहनशील है।

पोका बोईंग और रेड रॉट जैसे रोगों को सहने की शक्ति रखती है गन्ने की यह अर्ली किस्म:Know about COLK-12207 sugarcane variety

COLK-12207 गन्ना किस्म गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ द्वारा बनायीं गयी किस्म है। यह एक माध्यम मोटाई वाली गन्ना किस्म है। इसका गन्ना अधिक ठोस होता है। इसके एक गन्ने का वजन 2 से 2.5 किलोग्राम तक रहता है। यह किस्म गिरने के प्रति सहनशील है। रेड रॉट और पोका बोईंग जैसे खतरनाक रोग इस गन्ना किस्म में नहीं लगता। इस किस्म की इंटरनोड लंबी होती है।

जल भराव वाले क्षेत्र के लिए सबसे अच्छी गन्ना किस्म:CO-98014 गन्ना किस्म की विशेषताएं

CO-98014 गन्ना किस्म अपनी लंबाई के लिए जानी जाती है। इसका गन्ना 12 से 13 फीट लम्बा हो जाता है। इस गन्ने की मोटाई थोड़ी कम होती है। इस गन्ना किस्म में किसी भी प्रकार के कोई रोग जैसे-टॉप बोरोर, पोका बोइंग और रेड रोड जैसी समस्या नहीं देखने को मिलती।

पौधे की संरचना: जमीन के ऊपर और नीचे का सफर: Plant structure

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