लहसुन की खेती

लहसुन में जबरदस्त रोग:बारिश के बाद तेजी से फैल रहा है यह रोग, सावधान रहें किसान:Main diseases of garlic

4 से 5 दिन बारिश और बादल रहने की वजह से मौसम में लगातार नमी बनी हुई थी। इस समय लहसुन वाले खेतों में बहुत ही भयानक रोग देखे जा रहे हैं। अगर आप धूप लगने पर खेत की निगरानी करते हैं। तो आपको पर्पल ब्लाउज काफी अधिक क्षेत्रों में देखने को मिलता है। कुछ क्षेत्रों में तो डाउनी मिल्ड्यू के साथ-साथ जड़ में सफेद कीड़ा भी आपको देखने को मिल जाता है। लहसुन में नोक सुखना और पौधे बैठने की समस्या तो आम बनी हुई है ,अगर आपके खेत में भी इस प्रकार की किसी समस्या है।

लहसुन में आखिरी खाद कौन सा डालें:पैदावार बढ़ाने के लिए सही समय और सही मात्रा देना जरूरी:Time to apply last fertilizer to garlic

इस समय सभी किसानों की लहसुन की फसल लगभग 90 से 100 दिन की हो गई है। यह समय लहसुन में कंद बनने का होता है। लहसुन की लगभग सभी प्रकार की किस्म 120 से 160 दिन में पककर तैयार हो जाती हैं। आप इन इन किस्म में खाद डालते समय वैरायटी के हिसाब से 5-10 दिन ऊपर नीचे कर सकते हैं। लहसुन में आखिरी खाद आपकी पैदावार को बढ़ाने के साथ-साथ आपकी लहसुन की क्वालिटी को भी सुधरता है। जिससे आपके बाजार में अच्छे भाव मिल जाते हैं।

लहसुन में कीट, रोग व खुराक का चमत्कारी स्प्रे:फफूंद रोग, रस चूसक कीट और टॉनिक का बेस्ट कांबिनेशन:Best spray for garlic

इस समय लहसुन की फसल में डाउनी मिल्ड्यू रोग या अन्य फफूंद रोग अधिक मात्रा में देखने को मिल रहा है। क्योंकि मौसम में लगातार नमी बनी हुई है, और धूप कम निकला रही है। इस समय फफूंदी जनक रोगों के साथ-साथ लहसुन में थ्रिप्स की समस्या भी कहीं-कहीं देखी जाती है। थ्रिप्स में आपको पत्ते पर हल्के सिल्वर रंग के छोटे-छोटे कीड़े दिखाई देंगे या फिर आपको कहीं-कहीं पीली पत्तियां भी दिखाई देती हैं। इसके साथ-साथ लहसुन में धूप न निकलने की वजह से पौधा जमीन से पोषक तत्वों को नहीं उठा पाता। इसलिए हमें पोषक तत्वों का स्प्रे भी ऊपर से कर देना चाहिए।

लहसुन में कंद फटने की समस्या:कृषि जानकर ने बताया:एक स्प्रे में समाधान:Main reasons for bursting of bulbs in garlic

लहसुन में कंद फटने के कई कारण होते हैं। अधिक खाद और अधिक पानी की वजह से लहसुन में कंद फटने और तना फटने की समस्या देखी जा सकती है। इसके अतिरिक्त नाइट्रोजन का अत्यधिक प्रयोग से भी लहसुन में कंद फटने की समस्या आती है। जब आपके पौधे में न्यूट्रिशन वैल्यू ज्यादा हो जाती है। तो उसमें कंद फटने की समस्या रहती है। लहसुन में बोरोन की कमी के कारण भी यह समस्या देखने को मिलती है। 90 से 100 दिन पर लहसुन में कंद बनना शुरू हो जाता है, और उसके बाद ही यह समस्या आमतौर पर देखने को मिलती है।

लहसुन में नोक सुखना:पत्तियों का पीलापन:एक स्प्रे में संपूर्ण समाधान:Ways to remove yellowness in garlic

लहसुन में कई तरह के रोग लगातार देखने को मिलते हैं। अभी जो मौसम चल रहा है, इसमें लगातार धुंध पड़ रही है। मौसम में नमी होने के कारण लहसुन में कई तरह के रोग देखे जा रहे हैं। किसान साथी अपने खेत का निरीक्षण करते रहें और जांच रखें। अगर आपके लहसुन की पत्तियां पीली पड़ रही है, या ऊपर से नोक सूख रही है। इस समय लगातार नमी के कारण लहसुन की पत्तियों पर फंगस बन गई है। यह फंगस पत्तों पर काले रंग के धब्बे बना देती है। इसे डाउनी मिल्ड्यू रोग कहते हैं।

लहसुन में कितना कारगर है पिक्सल का प्रयोग:कंद वर्गीय फसलों के लिए रामबाण:Use of picxel in garlic

कुछ क्षेत्रों में जमीन काफी कठोर होती है। वहां पर कंद वर्गीय फसलें जैसे- आलू, प्याज, लहसुन, आदि फसलों को लगाने पर वह अच्छे से ग्रोथ नहीं कर पाते। क्योंकि अगर आपकी मिट्टी कठोर होगी, तो इन फसलों का कंद यानी फल अच्छे से नहीं बन पाता। इसलिए काफी स्थानों पर किसान इन फसलों को छोड़कर ऐसी फसलों का प्रयोग करते हैं। जिसमें ऊपर फल लगते हैं। अगर आप इस समस्या से परेशान हैं, तो आप एफएमसी के पिक्सेल प्रोडक्ट का प्रयोग कर सकते हैं।

लहसुन में 70-80 दिनों पर करें ये काम:फिर होगी बंपर पैदावार:Things to keep in mind about garlic

लहसन की फसल एक ऐसी फसल है। जिसमें कोई कल्लों का फुटाव नहीं होता। इसमें एक ही पौधे पर 10 से 12 पत्ते आते हैं। और उन्हें पत्तों से पूरी फसल पक जाती है। इसलिए अगर लहसुन में एक दो पत्ते का भी नुकसान होता है, तो यह आपकी पैदावार को घटा या बढ़ा सकता है। इसलिए आपको लहसुन में विशेष तौर पर ध्यान रखना पड़ता है। 70 से 80 दिन में लहसुन में कंद बनने का समय होता है। इस समय आपको अपनी फसल का विशेष ध्यान रखना पड़ता है।

लहसुन की उपज और क्वालिटी बढ़ाने का सबसे सस्ता स्प्रे:Water Soluble Spray in Garlic

लहसुन एक कंद वर्गीय फसल है। जिसमें जमीन के अंदर यह अपने फल का फैलाव करता है। लहसुन में कल्लों का फैलाव नहीं होता। इसमें एक ही पौधा होता है, और उसमें भी 11 से 12 पत्ते ही निकलते हैं। इन्हीं पत्तों से लहसुन की उपज व पैदावार को बढ़ाया जा सकता है। लहसुन की पैदावार को बढ़ाने के लिए आप आपको मिट्टी में खादों को देने के साथ-साथ आपको स्प्रे का भी ध्यान रखना पड़ता है।

लहसुन में कंद बनने के समय करें इस ताकतवर खाद का इस्तेमाल:लहसुन की मोटाई और वजन बढ़ाने का आसान तरीका:The most powerful fertilizer used in garlic

लहसुन एक कंद वर्गीय फसल है। लहसुन जमीन के अंदर तैयार होता है। इसको कंद को उखाड़ कर बाजार में बेचा जाता है। लहसुन से किसान भाई अच्छी पैदावार लेने के लिए तरह-तरह के खादों और न्यूट्रिएंट्स का प्रयोग करते हैं। आज मैं आपको ऐसे खाद के बारे में बताऊंगा, जो कंद वर्गीय फसलों में बड़े अच्छे रिजल्ट निकल कर देता है। कंद का साइज बढ़ाने के साथ-साथ यह कंद का वजन बढ़ाने में भी सहायता करता है।

गुड़ाई के समय लहसुन में क्या डालें:जड़ गलन समस्या व जड़ के कीड़े की रोकथाम,कृषि वैज्ञानिक:Do this work in garlic while weeding

लहसुन में जड़ गलन की समस्या सभी क्षेत्रों में देखने को मिलती है। जड़ गलन में पौधे की जड़ काली होकर धीरे-धीरे सूख जाती हैं। पहले पौधे के नीचे वाली पत्तियां पीली होती हैं, और बाद में पूरा पौधा पीला होकर सूख जाता है। जड़ गलन की समस्या उन खेतों में अधिक देखने को मिलती है। जहां लहसुन में नमी ज्यादा पाई जाती है।

लहसुन में लगने वाले सबसे ख़तरनाक फफूंदी जनित रोग:लहसुन की ऊपर की पत्तियों का सूखना,कैसे करें रोकथाम:सम्पूर्ण जानें

लहसुन में वैसे तो कई प्रकार के फफूंदी जनक रोग लगते हैं लेकिन इनमें से सबसे ज्यादा खतरनाक डाउनी मिल्ड्यू रोग है। यह एक फफूंदी जनक बीमारी है। लगभग सभी क्षेत्रों में यह बीमारी हमें देखने को मिलती है। इस बीमारी से किसानों को काफी नुकसान होता है। जब तापमान कम होता है, और लहसुन की पत्ती गीली रहती है।

लहसुन में पीलापन:पौधे के पत्ते ऊपर से सूखने का मुख्या कारण, कृषि जानकार ने बताया ये तरीका:Reasons for yellowness in garlic

लहसुन में पीलापन आने का मुख्य कारण मौसम का परिवर्तन होता है। मौसम में रात में ठंड अधिक बढ़ जाती है, और दिन में तेज धूप होने के कारण गर्मी रहती है। इसलिए पौधे तनाव में आ जाते हैं। जिससे उसमें भयंकर पीलापन आ जाता है। और उसकी पत्तियां धीरे-धीरे सूखने लगते हैं। इसको आप सर्द गर्म के कारण भी बोल सकते हैं।