गन्ने बिजाई की नई विधि:अधिक पैदावार के लिए बिजाई करते समय क्या सावधानियां रखें:Benefits of sowing with ring pit method

By Kheti jankari

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गन्ने की रिंग पिट विधि

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गन्ने की बिजाई आजकल अनेक विधियों से होने लगी है। कुछ किसान भाई अभी तक अपनी साधारण विधि से ही बिजाई करते हैं। लेकिन कुछ बड़े किसान गन्ने की नई-नई विधियों को अपनाकर अधिक पैदावार ले रहे हैं। छोटा किसान को गन्ने की नई विधि से बिजाई करने में मुश्किल होती है, क्योंकि इसके लिए नए साधनों की आवश्यकता पड़ती है। और उनका खर्च अधिक पड़ता है। आज मैं आपको गन्ने की रिंग पिट विधि के बारे में बताऊंगा, कैसे इसकी बिजाई करें, क्या-क्या सावधानियां रखें और इसमें किसान कहां धोखा खा जाता है। पूरी जानकारी आगे लेख में जानें।

गन्ने की रिंग पिट विधि

गन्ने की रिंग पिट विधि में गहरे गोल गड्ढे में गन्ने की बिजाई की जाती है। इस विधि में खेत में 1.5 फ़ीट गहरे और 2 फीट गोलार्ध वाले गोल गड्ढे बनाए जाते हैं। उनके अंदर गन्ने की एक आंख की पूरी लगाई जाती है। यह गन्ना बिजाई तरीका रिंग पिट विधि कहलाता है। रिंग पिट विधि में एक एकड़ में लगभग 1800 से 2000 गड्ढे बन जाते हैं। गन्ने की रिंग पिट विधि में गड्ढे की लाइन से लाइन की दूरी 5.5 से 6 फीट और गड्ढे से गड्ढे की दूरी 1.5 से 2 फीट रखनी पड़ती है। इन गड्ढे को आपस में फावड़े की सहायता से मिलना होता है। ताकि इन गड्ढे में ही आसानी से पानी दिया जा सके। एक गड्ढे में 30 से 35 आंखें लगाई जाती है।

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इस विधि में खाद की बात करें, तो खाद आप जुताई से पहले खेत तैयारी के समय भी डाल सकते है, और गड्ढे खुदाई के बाद उसमें भी गोबर की खाद या केमिकल फर्टिलाइजर का इस्तेमाल कर सकते हैं। जैसे भी आपको सही रहता है, आप खाद का इस्तेमाल कर सकते है। इस विधि में किसानों का बजाई पर खर्च अन्य विधि के मुकाबले थोड़ा अधिक आता है।

गन्ने की रिंग पिट विधि से बिजाई करने के फायदे

  • किसान साथियों अगर आप रिंग पिट विधि से अपने गन्ने की बिजाई करते हैं। तो इसकी पैडी 4 से 5 साल तक आसानी से चल जाती है।
  • इसमें पैदावार भी आपको सामान्य विधि से थोड़ी अधिक ही मिलती है। रिंग पिट विधि से 600 से 700 क्वांटल प्रति एकड़ पैदावार आसानी से मिल जाती है।
  • इस विधि से बिजाई करने पर आपका निराई-गुड़ाई का खर्च बच जाता है। क्योंकि इसमें एक बार की खुदाई में ही काम चल जाता है।
  • रिंग पिट विधि में पानी बहुत कम मात्रा में लगता है। क्योंकि हमें पानी सिर्फ गढ़ों में ही चलना पड़ता है।
  • इस विधि में गन्ने में बंधाई करने का खर्च बहुत कम लगता है। एक बार बंधाई में ही काम चल जाता है।

रिंग पिट विधि से बिजाई करने में सावधानियां

  • रिंग पिट विधि से बिजाई करने पर हमें बीच की मात्रा अधिक लेनी पड़ती है। इसलिए 30 से 35 आंखें एक गड्ढे में लगानी चाहिए।
  • बिजाई के बाद खेत में हल्का पानी लगना चाहिए। पानी सिर्फ गड्ढे में ही लगाएँ, पूरे खेत में पानी न लगायें। क्यूंकि पानी अधिक होने के कारण गड्ढे में मिटटी भर जाती है, जिससे जमाव प्रभावित होता है।
  • पानी लगाने के 7 से 8 दिन बाद गड्ढे में हल्की मिट्टी बिखेर दें। जिससे जमाव अच्छे से हो सके।
  • रिंग पिट विधि में अधिकतर किसान गड्ढे में कम आंखें लगते हैं। क्योंकि इस विधि में गन्ने का जमाव थोड़ा काम होता है। गन्ने का जमाव कम होने से खेत में गन्नों की संख्या कम होती है। और किसानों की पैदावार में कमी देखने को मिलती है।
  • इसलिए जब भी आप रिंग पिट विधि से बिजाई करना चाहते हैं। तो पहले कम भूमि पर बिजाई करें। उसके बाद आप को अगर अनुभव हो जाए। फिर आप अधिक क्षेत्र में बिजाई कर सकते हैं।

नोट- किसान भाई गन्ने की बिजाई करने से पहले बीज उपचार फफूंदीनाशक और कीटनाशक से अवश्य करें।

आपको मेरे द्वारा दी गई जानकारी कैसी लगी। कृपया कमेंट के माध्यम से जरूर बताएं और इसे आगे अन्य किसानों तक अवश्य शेयर करें। धन्यवाद!

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