गन्ने की खेती

COPB-95 अर्ली गन्ना किस्म की विशेषताएं(2023)|COPB-95 Early Sugarcane Variety

गन्ना एक प्रमुख व्यावसायिक फसल है। जो विषम परिस्थितियों में भी किसानों को एक अच्छी पैदावार निकाल के देती है। गन्ने की खेती अपने आप में सुरक्षित और लाभकारी खेती होती है। दोमट मिट्टी जिसमें सिंचाई की उचित व्यवस्था हो। और भूमि का पीएच मान 6.5 से 7.5 के बीच हो गन्ने के लिए सर्वोत्तम रहती है। गन्ने की फसल में अधिक पानी की जरूरत होती है। होती है। गन्ना चीनी का मुख्य स्रोत है। लगभग पूरे भारत में गन्ने की खेती की जाती है।

गन्ना नर्सरी:कैसे है लाभकारी,संपूर्ण जाने, प्रगतिशील किसानों की पहली पसंद क्यों बना ये तरीका:Benefits of preparing sugarcane nursery

गन्ने की वैसे तो अनेक विधियां देखी जाती हैं, और उनसे गन्ने की बिजाई भी किसान लंबे समय से करते आ रहे हैं। लेकिन पिछले 1 से 2 सालों में गन्ना नर्सरी तैयार करने का चलन काफी बढ़ गया है। गन्ना नर्सरी से बिजाई करने पर किसानों को काफी ज्यादा लाभ भी देखने को मिल रहे हैं। गन्ना नर्सरी क्यों लाभकारी है, अगर इस पर बात करें तो इसके अनेक लाभ हैं। जो आप नीचे इस लेख में बताये गए है। प्रगतिशील किसान इस समय गन्ने की नर्सरी से काफी अच्छी पैदावार ले रहे हैं।

पैड़ी गन्ने में पहला मुख्या खाद:अधिक कल्लों और मजबूत गन्ने के लिए मुख्या खाद:First main fertilizer in paddy sugarcane

आज इस लेख में आपको गन्ने में अच्छी और अधिक टेलरिंग के लिए कौन सी खाद का प्रयोग करना है, इस बारे में संपूर्ण जानकारी मिलेगी। गन्ने की खेती के लिए जल निकास वाली 2 दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। जब हम पौधा गन्ने की बिजाई करते हैं। तो उससे किसानों को ज्यादा पैदावार देखने को मिलती है। लेकिन पैड़ी गन्ना में पैदावार थोड़ी घट जाती है। इसका मुख्य कारण होता है। कि शुरू में समय पर खादों का सही प्रयोग ना करना।

गन्ना बोने की वर्टिकल विधि:बंपर पैदावार का लेने का आसान तरीका:What is vertical method of sugarcane

गन्ने बिजाई की रोज नई-नई विधियां आपको देखने को मिल रही है। जिसमें मुख्य विधियां रिंग पिट विधि, ट्रैंच विधि और पौधा नर्सरी से गन्ने की बिजाई की जाती है। लेकिन गन्ने की एक नई विधि काफी प्रचलित है। यह विधि सबसे पहले यूपी के किसानों द्वारा अपनायी गयी थी। इसमें बीज कम मात्रा में लगता है। इस विधि से किसान बड़ी अच्छी पैदावार निकल के दे रहे है। गन्ने की यह विधि वर्टिकल विधि के नाम से जानी जाती है।

गन्ने की टॉप 10 किस्में:Top 10 varieties of sugarcane

गन्ने की अनेक इसमें भारत में बिजाई की जाती है। इनमें से कुछ किस्में किसान भाई लंबे समय से प्रयोग करते आ रहे हैं। लेकिन अब वह इतनी अच्छी पैदावार निकाल कर नहीं देती या ये कहें की नई-नई किस्में उनसे ज्यादा पैदावार निकाल कर देती हैं। पुरानी किस्मों में रोग भी बहुत कम मात्रा में लगते हैं।

गन्ने की खेती से अधिक पैदावार लेने के सिंपल तरीके:प्रगतिशील किसान का अनुभव:how get more yield from sugarcane farming

गन्ने की अनेक विधियों से बजाई की जाती है। लेकिन गन्ने की जो पुरानी और परंपरागत विधि है, उसमें किसान 28 इंच की दूरी पर बिजाई करते है। भारत के ज्यादातर किसान इसी विधि से बिजाई करते हैं। लेकिन अब कुछ किसान रिंग फिट विधि, वर्टिकल विधि और ट्रेंच विधि से भी गन्ने की बिजाई करने लगे हैं। आजकल गन्ने की पौध तैयार करके भी बिजाई की जाती है। गन्ने की लगभग सभी विधियां एक जैसी ही पैदावार निकाल कर देती हैं। 10% किसानों पर ही गन्ने की पैदावार अधिक निकलती है।

गन्ने की उपज बढ़ाने का मूल मंत्र:गन्ना वैज्ञानिकों ने पौधा गन्ना और पैड़ी गन्ना के लिए बताया ये तरीका:Solution to increase sugarcane production

इस समय पौधा गन्ना की कटाई चल रही है, और कुछ किसान भाई गन्ना की बिजाई भी शुरू कर रहे होंगे। हम गन्ने से किस प्रकार अधिक पैदावार ले सकते हैं। गन्ने से अधिक पैदावार लेने के लिए आपको हमें उसमें शुरू से ही कुछ कार्य करने पड़ते हैं। जिससे उसकी शुरू से ही ग्रोथ होकर चले और वह आपको अच्छी पैदावार निकाल कर दे। इसके लिए हम खाद के साथ-साथ कुछ और चीजों का भी ध्यान रखना पड़ता है। इन सब चीजों को मिलकर ही एक खेत से अच्छी पैदावार ली जा सकती है।

2024 में गन्ना किस्म 0238 की बिजाई:करें यह जरूरी काम, रोगों से बचाव करने का आसान तरीका:Way to protect sugarcane variety CO-0238 from diseases

पिछले वर्षों में देखा जा रहा है, कि गन्ना किस्म CO-0238 किसानों को कई काफी अच्छी पैदावार निकाल कर दे रही थी। पैदावार की बात करें, तो इस किस्म ने आज तक गन्ने की सभी किस्मों में सबसे अधिक पैदावार निकाल कर दी है। लेकिन अब यह किस्म रोग ग्रसित हो चुकी है। इसमें काफी अधिक मात्रा में रेड रॉट, टॉप बोरर और पोका बोइंग जैसे रोग देखने को मिल रहे हैं। जिससे किसानों का इस किस्म पर खर्च काफी अधिक बढ़ गया है, और उनकी पैदावार भी घाटी है। क्योंकि गन्ने में रोग ही इतनी भयानक लगते कि बार-बार स्प्रे करने पर भी वह आसानी से कंट्रोल नहीं किया जा सके।

पौधा गन्ना की कटाई के बाद मुख्य स्प्रे:Main spray of plant after harvesting of sugarcane

पौधा गन्ना की कटाई शुरू हो चुकी है। किसान भाई फरवरी से लेकर मार्च तक पौधा गन्ना की कटाई करते हैं। कुछ किसान भाई गेहूं वाले खेतों में गन्ना बिजाई करते हैं, और वह उसे समय तब भी गन्ने का बीज रखने के लिए गन्ने को रखते हैं। जब भी आप पौधा गन्ना की कटाई करें। उसके बाद आपको उसमें कुछ ऐसे कार्य करने चाहिए। जिससे उसमें शुरू से ही कीट रोग या फंगस रोग ना लगे और आपके कल्लों का फुटाव बेहतर हो। क्योंकि अक्सर देखा जाता है, कि किसान भाई गन्ना कटाई के बाद उसमें गन्ने की जड़ें कट फट जाती हैं, और उनमें फंगस और कीट रोग ज्यादा मात्रा में देखने को मिलते हैं। जिससे जड़ें खराब हो जाती हैं, और उनका जमाव अच्छे से नहीं होता। इसलिए हमें गन्ना कटाई के तुरंत बाद ही उसमें एक स्प्रे कर देना चाहिए।

CO-3102 गन्ना किस्म की विशेषताएं:New variety of sugarcane

गन्ने की अनेक किस्म भारत के अलग-अलग राज्यों में बिजाई की जाती है। लेकिन कुछ ऐसी किस्में भी है, जो लगभग सभी क्षेत्रों में काफी अच्छी पैदावार निकाल कर देती है। गन्ने की सबसे अधिक पैदावार महाराष्ट्र में निकलती है। लेकिन अब हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में भी गन्ने की ऐसी नई-नई किस्में देखी जा रही हैं। जो महाराष्ट्र के बराबर पैदावार निकाल कर दे रही हैं। ऐसी ही एक गन्ना किस्म जिसकी बजाई आप लगभग पूरे भारत में कर सकते हैं। यह गन्ना किस्म ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा में काफी अच्छी पैदावार निकाल कर दे रही है।

गन्ना बिजाई में प्रमुख कीटनाशक:Major pesticides in sugarcane sowing

गन्ने की बिजाई के समय जितना जितना महत्व खादों का होता है, उतना ही कीटनाशकों का भी होता है। क्योंकि जमीन के अंदर दीमक और सफेद गिडार जैसे कीट गन्ने में अधिक मात्रा में लगते हैं। जो आपके गन्ने के जमाव को तो प्रभावित करते ही है, और गन्ने की जड़ों को खाकर खराब कर देते हैं। जिससे आपकी पैदावार में गिरावट आती है।

गन्ना बिजाई से पहले गहरी जुताई करने के फायदे:Benefits of deep plowing before sowing crop

आजकल अधिकतर किसान साथी, रोटावेटर से अपने खेतों की जुताई अधिक करते हैं। रोटावेटर से जुताई करना किसानों के लिए थोड़ा सस्ता पड़ जाता है, और इसमें जमीन की ऊपरी परत भुरभुर आसानी से हो जाती है। लेकिन रोटावेटर से जुताई करने से किसानों का काफी नुकसान भी होता है। उनकी मिट्टी में ज्यादा गहराई तक जुताई नहीं हो पाती, जिससे उनकी मिट्टी जमीन की जल ग्रहण करने की क्षमता और उपजाऊ क्षमता कम हो जाती है।

गन्ने की रिंग पिट विधि:Benefits of sowing with ring pit method

गन्ने की बिजाई आजकल अनेक विधियों से होने लगी है। कुछ किसान भाई अभी तक अपनी साधारण विधि से ही बिजाई करते हैं। लेकिन कुछ बड़े किसान गन्ने की नई-नई विधियों को अपनाकर अधिक पैदावार ले रहे हैं। छोटा किसान को गन्ने की नई विधि से बिजाई करने में मुश्किल होती है, क्योंकि इसके लिए नए साधनों की आवश्यकता पड़ती है। और उनका खर्च अधिक पड़ता है। आज मैं आपको गन्ने की रिंग पिट विधि के बारे में बताऊंगा, कैसे इसकी बिजाई करें, क्या-क्या सावधानियां रखें और इसमें किसान कहां धोखा खा जाता है

गन्ने में ट्राइकोडर्मा का प्रयोग:ट्राइकोडर्मा को गोबर की खाद या पानी के साथ मिलने का सही तरीका:When to use Trichoderma in sugarcane

किसी भी फसल से अधिक पैदावार लेने में मिट्टी का काफी ज्यादा महत्व होता है। अगर आपकी मिट्टी रोग रहित है, और उसमें मित्र कीट या मित्र जीवाणु पर्याप्त मात्रा में है। तो आपको आप कम खर्चे में भी अधिक पैदावार ले सकते है। आपको रासायनिक दवाइयां का प्रयोग भी कम मात्रा में करना पड़ेगा और आपकी मिट्टी अधिक समय तक सुरक्षित रहेगी। ऐसे ही आप ट्राइकोडर्मा फफूंद का प्रयोग कर सकते हैं। ट्राइकोडर्मा फफूंद खेत के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद होता है।

CO-5009 गन्ना किस्म की विशेषताएं:CO-5009 Sugarcane Variety Identification

एक अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए हमें एक अच्छी किस्म का चुनाव करना बहुत ज्यादा आवश्यक होता है। क्योंकि किस्म पर ही निर्भर करता है, कि उसमें कितनी पैदावार देने की क्षमता है। कुछ गन्ना किस्में रोग ग्रसित हो चुकी हैं। वह पैदावार भले ही अच्छी निकल कर दें। लेकिन उनका उन पर किसानों का खर्च अधिक होता है। भारत के वैज्ञानिकों ने एक किस्म तैयार की है, जो CO-5009 के नाम से जानी जाती है।

गन्ना बुवाई करते समय ध्यान रखने योग्य बातें:Things to keep in mind while sowing sugarcane

गन्ना एक लंबे समय में पकने वाली फसल है। गन्ना की फसल पकने में 10 से 12 महीने का समय लेती है। इस फसल पर खर्च भी अधिक आता है। आजकल किसान गन्ने की बजाई अनेक विधियों से करते हैं। कुछ किसान भाई 4 से 5 फ़ीट पर बिजाई करते हैं। कुछ रिंग पिट विधि से, कुछ वर्टिकल विधि से तथा कुछ अपनी सामान्य विधि 20 से 30 इंच पर बिजाई करते हैं। किसान साथियों आप किसी भी विधि से बिजाई करें। लेकिन सामान्य और पुरानी विधि में सबसे कम खर्चे में गन्ना तैयार होता है। किसान साथियों गन्ने की बिजाई करते समय हमें कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आप कम खर्चे में अधिक पैदावार ले सकें और गन्ने जमाव भी अच्छे से हो। कुछ मुख्य बातें नीचे बताई गई है।

गन्ना बिजाई से पहले मिट्टी शोधन कैसे करें:How to purify soil before sowing sugarcane

गन्ने में लगने वाले अधिकतर फफूंदी नाशक और कीट रोग के कीटाणु मिट्टी में लंबे समय तक पड़े रहते हैं। यह आपकी मिट्टी में बिजाई के समय से पहले ही पनपते रहते हैं। भूमि उपचार करने से हमारी मिट्टी में पड़े कीटाणु मर जाते हैं। और फसल में कोई रोग नहीं लगता। भूमि उपचार हम जैविक कीटनाशकों और फफूंदीनाशकों के द्वारा करते हैं। गन्ने में लगने वाले रेड रॉट,पोका बोईंग और टॉप बोरर जैसे खतरनाक रोगों की रोकथाम के लिए भूमि उपचार सबसे अधिक जरूरी है।

COLK-9709 गन्ना किस्म:Features of COLK-9709 Sugarcane Variety

गन्ना किस्म CO-0238 वैरायटी पिछले कई सालों से किसानों को काफी अच्छी पैदावार निकाल कर दे रही थी। लेकिन पिछले वर्ष इस गन्ना किस्म में टॉप बोरोर और रेड रॉट जैसी बीमारी काफी अधिक मात्रा में देखने को मिली है। जिससे किसान भाइयों का इस किस्म पर खर्च थोड़ा अधिक बढ़ा है, और इस बार इसकी पैदावार भी कम निकली है। CO-0238 गन्ना किस्म के मुकाबले की पैदावार देने वाली एक गन्ना किस्म COLK-9709 जो भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ के द्वारा बनाई गई है।