Kheti jankari

मैं एक किसान हूँ, और खेती में एक्सपर्ट लोगो से मेरा संपर्क है। मैं उनके द्वारा दी गयी जानकारी और अनुभव को आपके साथ साँझा करता हूँ। मेरा प्रयास किसानों तक सही जानकारी देना है। ताकि खेती पर हो रहे खर्च को कम किया जा सके।

COLK-15466 गन्ना किस्म की विशेषताएं:COLK-15466 Sugarcane variety

गन्ने की यह किस्म लखनऊ गन्ना अनुसंधान संस्थान उत्तर प्रदेश द्वारा बनाई गई है। इस किस्म में कल्लों का फुटाव अधिक होता है। यह किस्म गिरने के प्रति सहनशील है। गुड़ बनाने और रस निकालने के लिए यह गन्ना सबसे उपयुक्त रहती है। इस किस्म में शर्करा की मात्रा 17.5% तक पाई जाती है। पोका बोईंग और लाल सड़न जैसे रोगों के प्रति यह गन्ना किस्म सहनशील है।

गेहूं में प्रयोग होने वाली एक्सियल खरपतवार नासी की चार खास बातें शायद किसानों को नहीं पता होंगी(2024):axial syngenta top herbicide

गेहूं में सकरी पत्ती और चौड़ी पत्ती दोनों प्रकार के खरपतवार पाए जाते हैं। सकरी पत्ती के खरपतवारों को नष्ट करने के लिए सेंकर और टॉपिक कुछ पुरानी दवाइयां हैं, जिनका इस्तेमाल किसान काफी समय से लगातार करते आ रहे हैं। और चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों को नष्ट करने के लिए 24D, अलग्रिप और नाबूद दवाइयां का इस्तेमाल किया जाता है। सकरी पत्ती वाले खरपतवारों में मंडूसी सबसे खतरनाक और सबसे अधिक उगने वाला खरपतवार नासक है।

सरसों वाले किसान सावधान:तेजी से फ़ैल रहा है ये रोग, समय पर करें रोकथाम,पहचान, रोकथाम का तरीका सम्पूर्ण जानें

सरसों की फसल में इल्ली (सुंडी) आपके बीच वाले पत्तों या उससे नीचे वाले पत्तों पर देखने को मिलेगी। इसमें आपको झुंड में पत्तों पर छोटी-छोटी सुंडियां नजर आएगी। यह सुंडियां पत्तों का रस चूस कर उसे पर छोटे-छोटे होल बना देती हैं। और धीरे-धीरे पत्ते को सूखा देती है। आप अपने खेत में इस रोग की आसानी से पहचान कर सकते हैं। सुंडियों के ऊपर हलकी हलकी धारियां होती है। इसके अंडे आपको पत्तों के निचले भाग पर देखने को मिलते है। इसके अण्डों की संख्या भर मात्रा में होती है।

गेहूं में पानी कब लगाएं:कितनी बार लगाएं,पानी देने के इस तरीके से पैदावार को बढ़ाएं

गेहूं की फसल में 2 से 10 बार सिंचाई की जाती है। यह सिंचाई अलग-अलग क्षेत्र और जलवायु में कम या अधिक होती है। वैसे गेहूं में सामान्य तीन से चार सिंचाई की जाती है। गेहूं की पैदावार बढ़ाने के लिए हमें उसमें समय पर पानी और खाद देना बहुत ज्यादा आवश्यक है। समय पर पानी देकर आप अपनी पैदावार को एक से दो कुंतल प्रति एकड़ तक बढ़ा सकते हैं।

गेहूं में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों को खत्म करने का सस्ता और आसान तरीका(2024):broadleaf weeds in wheat

गेहूं की फसल में चौड़ी और सकरी पत्ती दोनों प्रकार के खरपतवार उगते हैं। गेहूं में खरपतवार आपकी फसल को 40% तक नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए इनको समय पर नष्ट करना बहुत ज्यादा आवश्यक होता है। जो खाद आप डालते हो वह आपकी गेहूं की फसल को लगने के साथ खरपतवारों को लगता है। जिससे वह और फलते फूलते रहते हैं। और गेहूं की फसल इन खरपतवारों के आगे कमजोर हो जाती है। जिससे आपकी पैदावार घट जाती है।

गेहूं में डीएपी की कमी:बिजाई के समय डीएपी का प्रयोग नहीं किया(2024),फास्फोरस की कमी पूरी करने का आसान तरीका जानें

अक्सर देखा गया है कि गेहूं बजाई के समय डीएपी की कमी हो जाती है। ऐसा पहले भी हो चुका है और आगे भी हो सकता है। कुछ किसानों ने इस साल गेहूं की बजाई में आधा बैग डीएपी डालकर काम चलाया है। गेहूं में डीएपी 50 किलोग्राम प्रति एकड़ तक प्रयोग होता है।

KRL-210 गेहूं किस्म की विशेषताएं:KRL-210 wheat variety

KRL-210 गेहूं किस्म केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान करनाल (हरियाणा) द्वारा बनाई गई है गेहूं की इस किस्म को वर्ष 2013 में बनाया गया था। इस किस्म को बनाने का उद्देश्य किसानों को जल भरवा वाले क्षेत्र और कल्लर मिट्टी में अधिक पैदावार निकाल कर देना। जिस क्षेत्र में बारिश के कारण पानी जमा हो जाता है, और उनके खेतों का पानी नहीं सूखता।

गेहूं में सल्फर को मिट्टी में दे या स्प्रे में(2024):कृषि वैज्ञानिक ने बताया गेहूं में सल्फर देने का ये सही तरीका

सल्फर एक ऐसा तत्व है, जो गेहूं की फसल के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। सल्फर गेहूं के लिए मुख्य पोषक तत्व होता है। पहले पौधे पर्यावरण से सल्फर की कमी को पूरा कर लेते थे। परंतु प्रदूषण अधिक होने की वजह से पौधा पर्यावरण से अब सल्फर की मात्रा में नहीं ले सकते। इसलिए हमें केमिकल तरीके द्वारा पौधे को सल्फर देनी पड़ती है। सल्फर की कमी रेताली जमीनों में अधिक महसूस होती है

गेहूं की फसल में पानी देने के बाद पीलापन:ये है मुख्य कारण, मात्र 150 रुपए में गेहूं का पीलापन दूर करें।

गेहूं की फसल में किसानों ने पानी लगना शुरू कर दिया है। कुछ किसानों की गेहूं की फसल में पानी लगाने से पहले भी हल्का पीलापन दिखाई दे रहा था। यह पीलापन पानी देने के बाद और भी अधिक बढ़ जाता है। गेहूं में पीलापन जिंक, सल्फर, मैग्नीशियम और मैंगनीज की कमी के कारण आता है।

गेहूं में अड़ियल मंडुसी (गुली डंडा) को भी जड़ से ख़त्म करने की क्षमता रखती है यह खास खरपतवार नाशक दवाई(2024):herbicide to kill weeds in wheat

गेहूं की बिजाई लगभग सभी किसानों ने पूरी कर ली है। कुछ किसान गन्ने की फसल काटकर गेहूं की लेट बिजाई कर रहे हैं। जिन किसानों ने गेहूं की बिजाई अक्टूबर में कर दी थी। उनकी गेहूं अब 25 से 30 दिन की हो गई है। अब उसमें आपको खरपतवार भी दिखने लगे होंगे। गेहूं में मुख्य रूप से पालक, मंडूसी (गुली डंडा), जंगली जाई, गजर घास और बथुआ आदि खरपतवार मुख्य रूप से उग जाते हैं।

गेहूं में जिंक डालें या नहीं(2024):जानें कृषि सलाहकार इस बारे में क्या कहते है

गेहूं की फसल में ज्यादातर किसान जिंक का प्रयोग नहीं करते। गेहूं में सल्फर अधिक मात्रा में प्रयोग किया जाता हैं। भारत में 40% से अधिक जमीनों पर जमीनों में जिंक की कमी पाई जाती है। जिंक एक ऐसा तत्व है, जिसको आप साल में अगर एक बार भी अपनी जमीन में डाल लेते हैं। तो उसको दोबारा डालने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

गेहूं में ह्यूमिक एसिड कब डालें:Benefits of humic acid in wheat

ह्यूमिक एसिड काला सोने के नाम से जाना जाता है। यहाँ एक आर्गेनिक खाद है। जो चट्टानों को पीसकर बनाया जाता है। ह्यूमिक एसिड तरल और दानेदार दोनों फॉर्म में बाजार में आपको आसानी से मिल जाएगा। तरल ह्यूमिक एसिड का प्रयोग आप स्प्रे या ड्रिप द्वारा कर सकते हैं। दानेदार ह्यूमिक एसिड का प्रयोग सीधा मिट्टी में किया जाता हैं। इसको आप खाद या रेत में मिलकर अपनी जमीन में डाल सकते हैं

मात्र 13 किलो यूरिया में तैयार करें अपनी गेहूं की फसल:कम खर्च में ऐसे लें अधिक पैदावार

खेती में यूरिया नईट्रोजन का मुख्या स्त्रोत होता है। वातावरण में 78% नइट्रोज़न पायी जाती है। लेकिन फिर पौधें को अलग से नइट्रोज़न की देने की आवश्यकता पड़ता है। क्यूंकि पौधा नइट्रोज़न को नाइट्रेट फॉर्म में लेता है। इसलिए फसल में यूरिया का सबसे अधिक प्रयोग किया जाता है। ज्यादातर यूरिया का प्रयोग किसानों द्वारा मिट्टी में किया जाता है। यूरिया अधिक मात्रा में प्रयोग करने से किसानों को यूरिया की किल्लत भी देखी जा सकती है।

गेहूं में जड़ों के पास दिखने लगा गुलाबी सुंडी का प्रकोप(2024):How to prevent caterpillar in wheat

गेहूं की बिजाई लगभग पूरी हो गयी है। कुछ किसानों की गेहूं की फसल 20 से 25 दिन की हो गई है। और किसान उसमें पानी लगाने की तैयारी कर रहे है। इस समय गेहूं की फसल में एक नई समस्या देखने को मिल रही है। गेहूं की जड़ों में आपको एक सुंडी दिखाई देगी। जिसका रंग हल्का गुलाबी है। और वह जड़ों को काटकर गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा रही है। अगर अपने गेहूं की सुपर सीडर या हैप्पी सीडर से गेहूं की हो तो उन खेतों में ये कीट आपको अधिक मात्रा में देखने को मिलता है।

आलू में झुलसा रोग की आने से पहले ही करें पहचान आपनाएँ ये आसान तरीका(2024):Potato crop diseases and treatment

आलू की फसल के पौधे जब बड़े हो जाए और पौधे आपस में टकराने लगे। पूरा खेत पत्तों से भर जाए और वातावरण में नमी हो या बार-बार बारिश हो रही हो। तो आलू में झुलसा रोग फैलने के लिए ये सबसे अच्छा समय होता हैं। जब ओस पत्तों पर अधिक देर रहती है, और दोपहर में धूप के कारण मौसम गर्म हो जाता है तापमान 10 से 20 डिग्री के बीच रहता है। उस समय आलू की फसल में झुलसा रोग तेजी से फैलता है।

COLK-12207 गन्ना किस्म की विशेषताएं:Know about COLK-12207 sugarcane variety

COLK-12207 गन्ना किस्म गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ द्वारा बनायीं गयी किस्म है। यह एक माध्यम मोटाई वाली गन्ना किस्म है। इसका गन्ना अधिक ठोस होता है। इसके एक गन्ने का वजन 2 से 2.5 किलोग्राम तक रहता है। यह किस्म गिरने के प्रति सहनशील है। रेड रॉट और पोका बोईंग जैसे खतरनाक रोग इस गन्ना किस्म में नहीं लगता। इस किस्म की इंटरनोड लंबी होती है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए रबी फसल का पंजीकरण शुरू(2024):How to register on Meri Fasal Mera Byora

मेरी फसल मेरी ब्यौरा में पंजीकरण करने के लिए आप अपने मोबाइल में मेरी फसल मेरा ब्यौरा वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं। या फिर आप सरकार द्वारा जारी एंड्रॉयड एप्लिकेशन मेरी फसल मेरी ब्यौरा को भी डाउनलोड कर सकते हैं। फसल का पंजीकरण आप नजदीकी सीएससी सेंटर भी कर सकते हैं। फसल के पंजीकरण के लिए आपको अपने खसरा नंबर या खेत का नंबर और अपना मोबाइल नंबर डालना होगा

15 दिन में आलू का साइज डबल करने के लिए सबसे दमदार स्प्रे:Best way to increase the size of potatoes

आलू एक ऐसी फसल है जिसमें आप जितना डालते हो उससे अधिक उसमें से निकाल सकते हो। आलू की फसल किसानों को हमेशा मुनाफा ही देती है। आलू में अत्यधिक खादों का प्रयोग करके आप पैदावार को बड़ा सकते हैं। जिन किसानों ने आलू की बिजाई किए हुए 30 से 40 दिन का समय हो गया है। वह किसान भाई इस समय अपने आलू का साइज बढ़ाने के लिए एक स्प्रे कर सकते हैं।