गन्ना

गन्ने में ट्राइकोडर्मा का प्रयोग:ट्राइकोडर्मा को गोबर की खाद या पानी के साथ मिलने का सही तरीका:When to use Trichoderma in sugarcane

किसी भी फसल से अधिक पैदावार लेने में मिट्टी का काफी ज्यादा महत्व होता है। अगर आपकी मिट्टी रोग रहित है, और उसमें मित्र कीट या मित्र जीवाणु पर्याप्त मात्रा में है। तो आपको आप कम खर्चे में भी अधिक पैदावार ले सकते है। आपको रासायनिक दवाइयां का प्रयोग भी कम मात्रा में करना पड़ेगा और आपकी मिट्टी अधिक समय तक सुरक्षित रहेगी। ऐसे ही आप ट्राइकोडर्मा फफूंद का प्रयोग कर सकते हैं। ट्राइकोडर्मा फफूंद खेत के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद होता है।

CO-5009 गन्ना किस्म की विशेषताएं:CO-5009 Sugarcane Variety Identification

एक अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए हमें एक अच्छी किस्म का चुनाव करना बहुत ज्यादा आवश्यक होता है। क्योंकि किस्म पर ही निर्भर करता है, कि उसमें कितनी पैदावार देने की क्षमता है। कुछ गन्ना किस्में रोग ग्रसित हो चुकी हैं। वह पैदावार भले ही अच्छी निकल कर दें। लेकिन उनका उन पर किसानों का खर्च अधिक होता है। भारत के वैज्ञानिकों ने एक किस्म तैयार की है, जो CO-5009 के नाम से जानी जाती है।

गन्ना बुवाई करते समय ध्यान रखने योग्य बातें:Things to keep in mind while sowing sugarcane

गन्ना एक लंबे समय में पकने वाली फसल है। गन्ना की फसल पकने में 10 से 12 महीने का समय लेती है। इस फसल पर खर्च भी अधिक आता है। आजकल किसान गन्ने की बजाई अनेक विधियों से करते हैं। कुछ किसान भाई 4 से 5 फ़ीट पर बिजाई करते हैं। कुछ रिंग पिट विधि से, कुछ वर्टिकल विधि से तथा कुछ अपनी सामान्य विधि 20 से 30 इंच पर बिजाई करते हैं। किसान साथियों आप किसी भी विधि से बिजाई करें। लेकिन सामान्य और पुरानी विधि में सबसे कम खर्चे में गन्ना तैयार होता है। किसान साथियों गन्ने की बिजाई करते समय हमें कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आप कम खर्चे में अधिक पैदावार ले सकें और गन्ने जमाव भी अच्छे से हो। कुछ मुख्य बातें नीचे बताई गई है।

COS-13231 गन्ना किस्म की विशेषताएं:new variety of sugarcane

हर वर्ष जल भराव के कारण किसानों की फसलों को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचता है। कईं क्षेत्रों तो बारिश का पानी इतना ज्यादा भर जाता है, कि वह गन्ने जैसी मर्द खेती को भी नुकसान पहुंचता है। जिन खेतों में जल भराव की समस्या रहती है। ऐसे खेतों में हमें ऐसी किस्म का चुनाव करना चाहिए। जो काफी ठोस हो और अत्यधिक पानी को सहन करने की क्षमता रखती हो। उत्तर प्रदेश के विज्ञानिकों ने एक गन्ना किस्म विकसित की है। जो COS-13231 के नाम से प्रसिद्ध है।

फ़र्टिलाइज़र और पेस्टिसाइड के कम रिजल्ट मिलने के मुख्या कारण:Main reasons for low results of fertilizers and pesticides

आजकल अधिकतर जमीनों में देखा जा रहा है, कि आप मिट्टी में जितने फर्टिलाइजर डालते हो। उनका आपको इतना अच्छा रिजल्ट देखने को नहीं मिलता। ऐसे ही आपको कीटनाशकों और फफूंदी नाशकों के रिजल्ट भी पहले से कम देखने को मिल रहे हैं। आपको अधिक मात्रा में इनका प्रयोग करना पड़ता है। इससे आपकी खादों और दवाइयां की लागत बढ़ गई है। और किसान को आर्थिक नुकसान हो रहा है।

गन्ना बिजाई से पहले मिट्टी शोधन कैसे करें:How to purify soil before sowing sugarcane

गन्ने में लगने वाले अधिकतर फफूंदी नाशक और कीट रोग के कीटाणु मिट्टी में लंबे समय तक पड़े रहते हैं। यह आपकी मिट्टी में बिजाई के समय से पहले ही पनपते रहते हैं। भूमि उपचार करने से हमारी मिट्टी में पड़े कीटाणु मर जाते हैं। और फसल में कोई रोग नहीं लगता। भूमि उपचार हम जैविक कीटनाशकों और फफूंदीनाशकों के द्वारा करते हैं। गन्ने में लगने वाले रेड रॉट,पोका बोईंग और टॉप बोरर जैसे खतरनाक रोगों की रोकथाम के लिए भूमि उपचार सबसे अधिक जरूरी है।

COLK-9709 गन्ना किस्म:Features of COLK-9709 Sugarcane Variety

गन्ना किस्म CO-0238 वैरायटी पिछले कई सालों से किसानों को काफी अच्छी पैदावार निकाल कर दे रही थी। लेकिन पिछले वर्ष इस गन्ना किस्म में टॉप बोरोर और रेड रॉट जैसी बीमारी काफी अधिक मात्रा में देखने को मिली है। जिससे किसान भाइयों का इस किस्म पर खर्च थोड़ा अधिक बढ़ा है, और इस बार इसकी पैदावार भी कम निकली है। CO-0238 गन्ना किस्म के मुकाबले की पैदावार देने वाली एक गन्ना किस्म COLK-9709 जो भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ के द्वारा बनाई गई है।

गन्ने में जड़ बेधक का नियंत्रण कैसे करें:गन्ने की ऊपरी पत्तियां पीली होने का कारण,Identification of root borer in sugarcane

न्ने के जिन पौधों में जड़ बेधक लगा हुआ होता है। उनकी जड़ के ऊपरी पोरियाँ में छोटे-छोटे छिद्र दिखाई देते हैं, और पोरी के अंदर भाग पर बारूदे जैसा बीट भरा रहता है। रोग ग्रसित भाग लाल रंग का दिखाई पड़ता है। इस रोग से प्रभावित पौधों की पत्तियां धीरे-धीरे पीली होकर सूखने लगती है। पौधे की ग्रोथ रुक जाती है। यह रोग आपकी गन्ने की फसल में किसी भी समय लग सकता है।

COS-13231 गन्ना किस्म की विशेषताएं:Early sugarcane variety of Uttar Pradesh

गन्ना किस्म COS-13231 एक उत्तर प्रदेश की गन्ना किस्म है। इस किस्म की पत्तियां मुलायम होती है। इसमें कांटे नहीं होते। इस किस्म की पोरी लम्बी होती है। और पोरी का कुछ भाग हल्का सफेद रंग का धब्बे होते है। इस किस्म की मोटाई माध्यम होती है।

पौधे में सूक्ष्म पोषक तत्वों का महत्व और कार्य(2024): Importance and function of micronutrients in plants

जिन तत्वों की पौधे को बहुत कम मात्रा में जरूरत पड़ती है। सूक्ष्म पोषक तत्व कहलाते है। इनकी पौधे को चाहे कम मात्र में आवश्यकता पड़े लेकिन यह पौधे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सूक्ष्म पोषक तत्व 9 प्रकार के होते हैं।

COLK-15466 गन्ना किस्म की विशेषताएं:COLK-15466 Sugarcane variety

गन्ने की यह किस्म लखनऊ गन्ना अनुसंधान संस्थान उत्तर प्रदेश द्वारा बनाई गई है। इस किस्म में कल्लों का फुटाव अधिक होता है। यह किस्म गिरने के प्रति सहनशील है। गुड़ बनाने और रस निकालने के लिए यह गन्ना सबसे उपयुक्त रहती है। इस किस्म में शर्करा की मात्रा 17.5% तक पाई जाती है। पोका बोईंग और लाल सड़न जैसे रोगों के प्रति यह गन्ना किस्म सहनशील है।

COLK-12207 गन्ना किस्म की विशेषताएं:Know about COLK-12207 sugarcane variety

COLK-12207 गन्ना किस्म गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ द्वारा बनायीं गयी किस्म है। यह एक माध्यम मोटाई वाली गन्ना किस्म है। इसका गन्ना अधिक ठोस होता है। इसके एक गन्ने का वजन 2 से 2.5 किलोग्राम तक रहता है। यह किस्म गिरने के प्रति सहनशील है। रेड रॉट और पोका बोईंग जैसे खतरनाक रोग इस गन्ना किस्म में नहीं लगता। इस किस्म की इंटरनोड लंबी होती है।

20 से 25 फुट लंबाई वाले गन्ने की किस्म के बारे में जानें:रोग रहित गन्ना किस्म,महाराष्ट्र की गन्ना किस्म

CO-8005 गन्ना किस्म महाराष्ट्र की गन्ना किस्म है। यह एक रोग रहित गन्ना किस्म है। इसमें पोका बोइंग या टॉप बोरर जैसे रोगों की कोई समस्या नहीं रहती। इसका अगोला गहरे हरे रंग का होता है। इस गन्ने की लंबाई 20 से 25 फीट तक हो जाती है। इस गन्ने की सबसे बड़ी समस्या गिरने की है।

गन्ने की बुवाई करते समय कृषि वैज्ञानिकों द्वारा बताई गई खाद पद्धति को जानें:fertilizers used in sugarcane

गन्ने की फसल में बिजाई करते समय हमें का एक संपूर्ण खादों का मिश्रण डालना चाहिए। जिससे लंबे समय तक पौधे को सभी प्रकार के पोषक तत्वों मिल सकें। गन्ना एक लंबी अवधि वाली फसल है। जो 10 से 12 महीने में पककर तैयार हो जाती है।

लोकप्रिय गन्ना किस्म सीईओ-08272 की संपूर्ण विशेषताएं:CO-08272 Sugarcane Variety

सीईओ-08272 गन्ना किस्म एक अगेती गन्ना किस्म है। जो गन्ने में लगने वाले मुख्य रोग जैसे पोका बोइंग और रेड रोड रोगों के प्रति सहनशील है। इस किस्म का गन्ना ठोस होता है। इसकी लंबाई कम होती है।

जल भराव वाले क्षेत्र के लिए सबसे अच्छी गन्ना किस्म:CO-98014 गन्ना किस्म की विशेषताएं

CO-98014 गन्ना किस्म अपनी लंबाई के लिए जानी जाती है। इसका गन्ना 12 से 13 फीट लम्बा हो जाता है। इस गन्ने की मोटाई थोड़ी कम होती है। इस गन्ना किस्म में किसी भी प्रकार के कोई रोग जैसे-टॉप बोरोर, पोका बोइंग और रेड रोड जैसी समस्या नहीं देखने को मिलती।

करनाल गन्ना अनुसंधान द्वारा बनाई गई गन्ना किस्म CO-15023 के बारे में जाने:Sugarcane Variety CO-15023

गन्ना भारत में उगाई जाने वाली प्रमुख फसल है। गन्ना चीनी का मुख्य स्रोत है। गन्ना एक ऐसी फसल है, जो हर प्रकार के मौसम को सहन करने की क्षमता रखता है। अत्यधिक बारिश, अत्यधिक गर्मी या ठंड में भी गन्ना अच्छी प्रकार से ग्रोथ करता रहता है।

गन्ने की अधिक पैदावार देने वाली गन्ना किस्म CO–11015 की विशेषताएं जानें:Sugarcane variety CO–11015

CO–11015 तमिलनाडु की गन्ना किस्म है। लेकिन इस किस्म की बजाई आप पुरे भारत में कर सकते है। जिसकी बजाई आप अक्टूबर और नवंबर में कर सकते हैं।